प्यासी भाभी प्रिया की रातें – देवर राहुल की हॉट स्टोरी
नमस्कार दोस्तों, मैं राहुल। आज आपको अपनी हॉट भाभी प्रिया की वो रातें सुनाता हूँ जो मेरे दिमाग से कभी नहीं गईं।
प्रिया भाभी की उम्र तीस साल है। फिगर 32-28-34। घर में वे हमेशा साड़ी पहनती हैं। साड़ी में उनका चिकना पेट और गहरी गोल नाभि देखकर मन पागल हो जाता है। भाई और पापा अक्सर बाहर रहते हैं। उन दिनों भी दोनों मुंबई गए हुए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी।
सुबह नाश्ते के समय भाभी काले रंग की साड़ी और डीप ब्लाउज में आईं। साड़ी नाभि से थोड़ी नीचे बँधी थी। चिकना पेट और गहरी नाभि पूरी नज़र आ रही थी। ब्लाउज के गले से स्तनों की हल्की लकीर भी झलक रही थी।
जब वे परांठा लेकर मेरे पास आईं तो उनकी नंगी कमर मेरे बिल्कुल सामने थी। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने हाथ बढ़ाकर उनके पेट पर रख दिया। भाभी की आँखें बंद हो गईं और उनके मुँह से हल्की सी “आह…” निकली। मैंने उंगली उनकी नाभि में घुमा दी। भाभी ने होंठ भींच लिए। फिर उन्होंने मेरा हाथ हटाया और इठलाती हुई कमरे में चली गईं।
रात को खाना खाते समय मैंने माफी मांगी। भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर अपने पेट पर रख दिया। उनकी आँखों में वासना साफ थी। मैंने पूरा हाथ उनके पेट और नाभि पर फेरना शुरू कर दिया। करीब पंद्रह मिनट तक सिर्फ पेट और नाभि को सहलाता रहा। भाभी की साँसें तेज़ हो रही थीं।
खाना खत्म होते ही भाभी बोलीं, “आज मेरे कमरे में सो जाओ।”
कमरे में पहुँचकर भाभी मेरे सामने खड़ी हो गईं। उन्होंने खुद मेरा हाथ पकड़कर अपने पेट पर फिरवाना शुरू कर दिया। मैं नाभि में उंगली डाल रहा था। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरा हाथ ऊपर खींचकर अपने स्तनों पर रख दिया। मैंने एक स्तन को हल्के से दबाया। भाभी की सिसकी निकल गई। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।
भाभी आगे बढ़ीं। उनका पेट और नाभि मेरे मुँह के सामने आ गया। मैंने जीभ निकालकर पेट चाटना शुरू कर दिया। बीस मिनट तक सिर्फ पेट और नाभि चूसता और चाटता रहा। भाभी का पेट लाल हो गया था। फिर मैंने साड़ी उतार दी। ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी भाभी को दीवार की तरफ घुमाया। कमर चूमी, ब्लाउज और ब्रा के हुक खोले।
जब वे घूमीं तो उनके गोल-मटोल स्तन मेरे सामने थे। मैंने दोनों को बारी-बारी से मुँह में लिया और चूसा। भाभी मेरे सिर पर हाथ फेरती रहीं। फिर होंठों पर होंठ रख दिए। उनके होंठ शहद जैसे मीठे थे। मैंने उनके नितंबों को मसलना शुरू कर दिया।
भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और लंड हाथ में लेकर सहलाने लगीं। “बड़ा है ये…” उन्होंने मुँह में लिया। जब मैं झड़ने ही वाला था तो उन्होंने कहा, “सब मेरे स्तनों पर डाल दो।” मैंने सारा वीर्य उनके स्तनों पर छोड़ दिया।
थोड़ी देर बाद पेटीकोट और पैंटी उतार दी। भाभी पूरी नंगी हो गईं। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और पूरे शरीर को चूसने लगा। होंठ, स्तन, पेट, नाभि… फिर नीचे पहुँचा। भाभी ने अपनी टाँगें फैला दीं। मैंने उनकी गीली चुत को जीभ से चाटा, अच्छी तरह गीला किया और फिर एक झटके में लंड अन्दर घुसेड़ दिया।
भाभी जोर से चिल्लाईं, “आह… धीरे… दर्द हो रहा है!”
“क्यों?” मैंने पूछा।
“तुम्हारे भैया का छोटा है… और महीने में एक-दो बार ही करते हैं…”
अब समझ आ गया। मैंने स्पीड बढ़ा दी। दोनों हाथों से उनके स्तन दबाते हुए ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा। बीस मिनट बाद मैंने सारा वीर्य उनकी चुत में छोड़ दिया। दोनों नंगे ही सो गए।
अगले दिन भाभी लाल साड़ी में आईं। नाश्ते के बाद मैं उनके कमरे में पहुँचा। उन्होंने पहले से ही साड़ी उतार रखी थी। ब्लाउज और पेटीकोट में बेड पर बैठी थीं। मैंने दरवाजा बंद किया, उन्हें उठाया और जोर से किस करने लगा। ब्लाउज खोलकर स्तन चूसे, पेट और नाभि को फिर से बीस मिनट तक चाटा। फिर पेटीकोट खोलकर पूरी नंगी कर दिया।
“अब पेलो…” भाभी बोलीं।
मैंने लंड अन्दर घुसेड़ा। पहले दर्द की सिसकियाँ थीं, फिर मस्ती की। बीस मिनट की जोरदार चुदाई के बाद मैंने वीर्य उनके स्तनों, पेट और नाभि पर छोड़ दिया। भाभी नंगी ही लेटी रहीं और मैं कपड़े पहनकर बाहर निकल गया।
उसके बाद से जब भी भाई-पापा दुकान पर रहते, मैं लंच के समय घर आकर भाभी को चोद लेता। प्रिया भाभी अब मेरे लिए पूरी तरह तैयार आइटम बन चुकी थीं।
दोस्तों, कैसी लगी ये स्टोरी बताना जरूर।
Category: Family Sex Stories