कजिन नयना की चूत और गांड दोनों फाड़ी
नमस्कार दोस्तों,
मेरा नाम रोहित है। उम्र अभी 24 है, लेकिन यह कहानी तब की है जब मैं 20 साल का था और मेरा लंड पहले से ही 7.5 इंच का खड़ा हो जाता था। मैंने आज तक जितनी लड़कियों को चोदा, उनमें सबसे ज्यादा मजा अपनी बुआ की बेटी नयना को चोदने में आया।
नयना मुझसे दो साल बड़ी थी। गोरी, 5 फुट 3 इंच, 34-28-36 का शरीर, बड़े-बड़े गोल मम्मे, पतली कमर और मोटी गांड। उसकी चूत हमेशा साफ और गुलाबी रहती थी। लॉकडाउन लगने से पहले वह मेरे घर सिर्फ दो दिन के लिए आई थी, लेकिन पूरा देश बंद हो गया और वह मेरे घर फंस गई।
शुरुआत के दो हफ्ते तो हम भाई-बहन जैसे रहे। एक कमरे में दो बेड। साथ में खाना, सीरीज देखना, कभी-कभी हाथ पकड़कर सो जाना। लेकिन तीसरे हफ्ते से नयना की नींद उड़ने लगी। एक रात डेढ़ बजे वह मेरे बेड पर आकर लेट गई।
“रोहित… अकेलापन मार रहा है,” उसने धीरे से कहा।
मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया। उसके गर्म मम्मे मेरी छाती से चिपक गए। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया और उसकी जांघों के बीच धंस गया। वह महसूस कर रही थी। फिर भी वह हट नहीं रही थी।
अगली रात उसने खुद कहा, “आज मुझे कसकर गले लगाना।”
जब मैंने उसे जोर से दबाया तो मेरे लंड ने उसकी चूत की दरार को अच्छी तरह महसूस किया। वह कांप गई। मैंने साहस करके उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वह अकड़ी रही, फिर उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। हमने आधे घंटे तक सिर्फ किस किया। थूक मुंह से मुंह में जा रहा था। मेरा लंड उसके पेट से रगड़ खा रहा था।
उस रात मैं बाथरूम गया और उसकी पहनी हुई पैंटी निकालकर उसके मुंह पर लपेटकर जोर-जोर से हिलाई। नयना का नाम ले-लेकर झड़ गया।
फिर एक हफ्ता सिर्फ हग, किस और मम्मे दबाने का चला। हर रात मैं उसके मम्मों को मुंह में लेकर चूसता, निपल्स काटता। वह आहें भरती लेकिन “अंदर मत करना” कहकर रोक देती।
दो दिन मैंने उससे बात नहीं की। तीसरी रात वह खुद आई, आंखों में आंसू लेकर बोली, “आज… जो करना है कर लो। बस दर्द मत देना ज्यादा।”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और सारे कपड़े फाड़कर उतार दिए। उसके बड़े-बड़े मम्मे बाहर निकल आए। मैंने एक मम्मा मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ से मसल रहा था। नयना की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं।
“आह्ह… रोहित… काट मत… उम्मम्म…”
फिर मैं नीचे गया। उसकी चूत पूरी गीली और बंद थी। मैंने जीभ से उसके चूत के होंठ चाटे, क्लिट को मुंह में लेकर चूसा। वह कमर उठा-उठाकर मेरी जीभ पर रगड़ने लगी। जब मैंने एक उंगली अंदर डाली तो वह चिल्ला उठी। खून की एक बूंद निकली। वर्जिन थी।
मैंने दो उंगलियां अंदर-बाहर करने लगे और जीभ से चाटता रहा। पांच मिनट में वह जोर से कांपते हुए झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने पूरा निगल लिया।
अब मेरा लंड फटने को था। मैंने वैसलीन लगाई और उसके दोनों पैर फैलाकर लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा।
“रोहित… धीरे… बहुत बड़ा है…”
मैंने उसके मुंह पर अपना मुंह रख दिया और एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। नयना की आंखों से आंसू निकल आए, वह मेरे कंधे में दांत गड़ा रही थी। चूत से खून बह रहा था। मैं रुका नहीं। दूसरे धक्के में पूरा 7.5 इंच अंदर धंस गया।
“आअअह्ह्ह… मर गई… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…”
मैंने उसके दोनों मम्मों को जोर से दबाया और धक्के देने शुरू कर दिए। पहले धीरे, फिर तेज। खून लंड पर लग रहा था, बेडशीट लाल हो रही थी। दस मिनट बाद दर्द कम हुआ और नयना खुद कमर हिलाने लगी।
“और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… रोहित… कुतिया बनाकर चोदो मुझे…”
मैंने उसे पलटा और कुतिया बना लिया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े, दूसरे से उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और पीछे से जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड हिल रही थी।
“ले चुदवा… कजिन की चूत में लंड घुसा… आह्ह… और तेज…”
मैंने उसे गोद में उठाया, दीवार से लगाकर खड़ा करके चोदा। फिर बेड पर लिटाकर उसके पैर उसके कंधों तक मोड़ दिए और सीधा ऊपर से पेलने लगा। जब निकलने वाला था तो मैंने लंड बाहर नहीं निकाला। उसकी चूत के अंदर ही पूरा वीर्य उड़ेल दिया।
नयना हांफ रही थी। मैं थोड़ा देर लेटा रहा, फिर फिर से खड़ा हो गया। दूसरी बार मैंने उसकी गांड चाटी। जीभ उसकी गांड के छेद में घुसाई। वह झिझक रही थी लेकिन मना नहीं कर रही थी। फिर मैंने लंड पर थूक लगाकर उसकी गांड में धीरे-धीरे घुसाना शुरू किया।
“नहीं… गांड में मत… बहुत दर्द होगा…”
मैंने सुना नहीं। आधा लंड अंदर जाने पर वह चिल्ला उठी। मैंने उसका मुंह दबाया और पूरा अंदर धकेल दिया। फिर जोर-जोर से गांड मारने लगा। उसकी गांड की सिटकी खुल गई थी। मैंने दस मिनट गांड मारी और फिर चूत में वापस डालकर दूसरी बार झड़ गया।
तीसरी बार हमने साधारण पोजीशन में किया। नयना खुद ऊपर बैठकर उछल-उछलकर चूद रही थी। उसके मम्मे मेरे मुंह में झूल रहे थे। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। आखिर में उसने खुद कहा, “मुंह में डाल… मैं पी जाऊंगी।”
मैंने लंड उसके मुंह में डाल दिया और पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। उसने निगल लिया और लंड चाटकर साफ कर दिया।
उस रात बेडशीट खून और वीर्य से गीली हो गई थी। मैंने सुबह होते-होते धो दी। नयना दो दिन बिस्तर से नहीं उठी। मैंने उसे दर्द की दवा और गर्भनिरोधक की गोली खिलाई।
उसके बाद लॉकडाउन खत्म होने तक हमने लगभग रोज चोदा। कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी रात। कभी मैं उसे किचन में चोदता, कभी बालकनी में। एक दिन मैंने उसे अपने लंड पर बैठाकर पूरे घर में घुमाया। वह शर्म से मर रही थी लेकिन चूद रही थी।
लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी जब भी हम मिलते हैं, नयना की चूत और गांड दोनों तैयार रहती हैं। आखिरी बार मैंने उसकी गांड इतनी जोर से मारी कि वह दो दिन बैठ नहीं पाई।
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