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Meri Aur Uski Kunwari Chut Ki Pehli Gandi Chudai

by Admin · 12-10-2026 · 7 views

यह वर्जिन फक स्टोरी मेरे लिए खास और अविस्मरणीय है क्योंकि इस चुदाई से मैंने और मेरी सेक्स पार्टनर दोनों ने अपना कुंवारापन खोया था। वो मेरे ही कस्बे की लड़की थी।चुदाई को तरसती हुई हर उम्र की चूत को मेरे मोटे, नसों से भरे मूसल लंड का वीर्य भरा नमस्कार।

मैं ज़ालिम जाट विक्रम, 26 साल का हरियाणवी जाट हूँ। मुझे चुदाई बेहद पसंद है और मैं पिछले 8 साल से महाचोदू बनकर हर तरह की चूत फाड़ता आ रहा हूँ। मैंने हर उम्र की औरत को चोदकर संतुष्ट किया है।

यह वर्जिन फक स्टोरी मेरे लिए खास है क्योंकि इस चुदाई में हम दोनों ने एक-दूसरे की कुंवारी चूत और लंड से अपना कौमार्य खोया था।

बात तब की है जब मैं डिप्लोमा कॉलेज में पढ़ता था। इस कहानी में मेरी पार्टनर सोनिया (बदला हुआ नाम) मेरे कस्बे में अपनी मौसी के पास रहती थी।

आगे बढ़ने से पहले सोनिया के बारे में थोड़ा बता दूँ।
वह साढ़े पाँच फुट की गोरी, गदराई, चिकनी चमड़ी वाली लड़की थी। उस समय उसके मम्मे 34B के रहे होंगे और उसकी गोल-गोल गांड शायद 36 की। उसकी चूत पर हल्की सी बालों की लाइन थी जो बाद में मैंने जीभ से चाट-चाट कर साफ की।

मैं और सोनिया बचपन से एक ही मोहल्ले में खेले-कूदे थे। स्कूल में एक साथ पढ़ना, शाम को गली में छुपन-छुपाई खेलना… फिर स्कूल बदल गए और मिलना कम हो गया। बाद में शहर के कॉलेज में साथ पढ़ने की वजह से फिर से पास आने लगे।

अब मैं सोनिया के जिस्म का दीवाना हो चुका था। बस में उसे सीट देकर खुद खड़ा रहना और खड़े-खड़े उसकी चूत और मम्मों पर तरसती निगाहें डालना… कोई दूसरा देख ले तो आँखों से गुस्सा दिखाना। कभी-कभी मैं उसके काफी करीब होता तो वो जरा भी असहज नहीं होती। धीरे-धीरे मैं उसकी हर छोटी बात पर ध्यान देने लगा—सूट की फिटिंग से लेकर लिपस्टिक और नेलपॉलिश तक।

फोन पर बातें शुरू हुईं। बचपन की शरारतों से शुरू होकर पर्सनल लाइफ तक पहुँच गईं। रोज कॉलेज जाते-आते आँखें चार होना और घर लौटकर देर रात तक फोन पर बातें करना… हम एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। बातें प्यार की हो गईं और फिर चुदाई की तरफ मुड़ने लगीं।

मैंने कॉलेज के रास्ते में उसके शरीर को छूना शुरू कर दिया। कभी कमर पर हाथ फेरना, कभी बस में भीड़ का फायदा लेकर उसकी गांड पर हाथ रखना। फोन पर तो मैं उसके कान में सीधे गंदी बातें करता—उसकी चूत कैसे गीली होती होगी, मेरे लंड को कैसे चूसेगी, कैसे उसकी कुंवारी चूत फाड़ूँगा। वो शरमाती जरूर थी लेकिन फोन काटती नहीं थी।

एक दिन वह सुनहरा मौका आ ही गया। उसकी मौसी गाँव चली गई और सोनिया ने मुझे रात को आने का मैसेज कर दिया।

मैंने घर पर खेत में सोने का बहाना बनाकर निकल गया और सीधा उनके घर के पिछले दरवाजे पर दस्तक दी। सोनिया 10 बजते ही पीछे का गेट खोलकर मुझे अंदर ले गई। दूसरे कमरे में ले जाकर गेट बंद किया।

जैसे ही गेट बंद हुआ, मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके गुलाबी, मोटे होंठ चूसने शुरू कर दिए। जीभ उसके मुँह में घुसा दी। वो भी मेरे होंठ चूसने लगी। मेरे हाथ उसके सूट के ऊपर से मम्मों को मसलने लगे। उसके मम्मे नरम और भारी थे। मैंने सूट ऊपर कर उसके ब्रा के ऊपर से निपल्स को चुटकी काटी तो वो हल्की सी कराह उठी।

मेरा लंड पजामे को फाड़कर बाहर आने को बेताब हो चुका था। मैंने पजामा घुटनों तक उतार दिया और सोनिया का हाथ पकड़कर अपने मोटे, गरम लंड पर रख दिया। वो पहली बार किसी का लंड छू रही थी। उसके कोमल हाथों से लंड को पकड़ते ही वो और सख्त हो गया। वो नाजुक हाथों से लंड को ऊपर-नीचे खींचने लगी जैसे दूध दुह रही हो। लंड की नसें फूल गई थीं और मुकुट से प्रीकम की बूँदें टपकने लगी थीं।

मैंने इशारा किया तो सोनिया शरमाते हुए अपने कपड़े उतारने लगी। सूट, सलवार, ब्रा, पैंटी… सब उतारकर नंगी हो गई। उसकी गोरी चमड़ी पर हल्की सी सिहरन थी। मम्मे गोल-गोल, निपल्स गुलाबी और खड़े। चूत पर हल्की बालों की लाइन और बीच में गुलाबी, बंद सी दरार। मैं भी पूरी तरह नंगा हो गया।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। सोनिया ने शर्म से दोनों हाथों से चेहरा ढक लिया और टाँगें भींच लीं। मैंने उसकी टाँगें जबरदस्ती फैलाईं। उसकी कुंवारी चूत की दरार साफ दिख रही थी। मैंने मुँह उसके बीच में रख दिया और जीभ से उसकी चूत की पूरी लम्बाई चाट दी।

“आह्ह…” सोनिया की हल्की सी कराह निकली। उसकी चूत की भीनी-भीनी गंध से मेरा दिमाग घूम गया। मैंने उसकी चूत के होंठों को चूसना शुरू किया, जीभ को बीच की दरार में घुसाकर ऊपर-नीचे फिराने लगा। क्लिट को जीभ की नोक से दबाने पर वो कमर ऊपर उठा लेती। मैं उसकी गांड के नीचे दोनों हाथ डालकर उसे और पास खींच रहा था।

थोड़ी देर चाटने के बाद सोनिया ने मेरे बाल पकड़कर सिर ऊपर खींचा और काँपती आवाज में कहा, “विक्कू… अब चोद भी दो… कोई जाग जाएगा…”

मैं तुरंत उठ गया। अपने मोटे लंड को उसकी गीली चूत के मुँह पर रख दिया और रगड़ने लगा। गुलाबी चूत के होंठ लंड के मुकुट पर चिपक रहे थे। मैंने उसके होंठ चूसते हुए एक हाथ से उसके मुँह को दबाया और दूसरे हाथ से उसकी गांड को थाम लिया। फिर एक जोरदार झटका मारा।

आधा लंड उसकी कुंवारी चूत में घुस गया।

सोनिया की दर्द भरी चीख मेरे हाथ के नीचे दब गई। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड के मुकुट पर तेज जलन महसूस हुई। मैंने लंड बाहर निकाला। मुकुट पर खून की हल्की सी लकीर थी और सोनिया की चूत से भी खून की बूँदें निकल रही थीं। हम दोनों जान गए थे—कुंवारापन टूट चुका है।

मैंने उसके चेहरे के पास मुँह लाकर कहा, “आई लव यू सोनिया…” और फिर उसके होंठ चूसने लगा। वो दर्द से आँखें बंद किए हुए थी।

“अब घर जाओ…” उसने फुसफुसाया।

लेकिन मैं चुदाई पूरी किए बिना जाने वाला नहीं था। मौका फिर कब मिलेगा पता नहीं। मैंने लंड के मुकुट पर थूक लगाया, अच्छी तरह गीला किया और फिर से उसकी खून से सनी चूत के मुँह पर रख दिया।

इस बार और जोर से धक्का मारा। पूरा लंड उसकी चूत में धँस गया। सोनिया की चीख निकल गई। आँखों से आँसू बहने लगे। उसकी चूत की दीवारें लंड को इतनी कसकर दबा रही थीं कि हिलना भी मुश्किल हो रहा था।

मैंने उसके मम्मों को मुँह में भरकर जोर-जोर से चूसना शुरू किया। निपल्स को दाँतों से हल्का काटा, जीभ से गोल-गोल घुमाया। एक हाथ से उसकी गांड मसल रहा था। धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और सोनिया की कमर हिलने लगी।

“विक्कू… अब जोर से चोदो…” उसने काँपती आवाज में कहा।

मैंने उसकी गर्दन पकड़ी और जोर-जोर से झटके मारने लगा। हर धक्के में लंड उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था। खून और रस मिलकर लंड को चिकना बना रहे थे। सोनिया अब गांड उठा-उठाकर मेरे झटकों का साथ दे रही थी। उसकी कराहें बदल गई थीं—

“आह्ह… उम्मम्म… विक्कू… और अंदर… फाड़ दो मेरी चूत…”

करीब दस-बारह मिनट की गहरी, जोरदार चुदाई के बाद सोनिया अचानक कस गई। उसकी चूत लंड को निचोड़ने लगी और वो जोर से काँपते हुए झड़ गई। उसका शरीर ढीला पड़ गया।

मैंने लंड बाहर निकाला। सोनिया की चूत खुली हुई, लाल, खून और रस से सनी हुई थी। मैं उसके मम्मों के पास जाकर बैठ गया और कहा, “हाथ से निकाल दे मेरा माल…”

सोनिया ने मुस्कुराते हुए मेरा मोटा, खून लगा लंड पकड़ लिया और तेजी से मूठ मारने लगी। दो-तीन मिनट में ही मेरे लंड से गाढ़ा, गरम वीर्य के फव्वारे छोड़े। पहला फव्वारा सीधे उसके मुँह और मम्मों पर गिरा। दूसरा उसके गले पर। तीसरा उसके मम्मों के बीच।

“ईशशश… ये क्या किया विक्कू!” उसने मुँह सिकोड़ते हुए कहा लेकिन आँखों में मुस्कान थी।

मैंने उसकी सलवार उठाकर दी। उसने अपने मम्मे और चेहरा साफ किया। हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। मैंने उसे अच्छे से चूमा, “शुभ रात्रि”, कहा और खेत की तरफ निकल गया। सोनिया अपने कमरे में चली गई।

इस तरह हम दोनों की पहली और यादगार कुंवारी चुदाई पूरी हुई।

उसके बाद सोनिया की चुदाई का मौका लंबे समय तक नहीं मिला। अगले साल उसका रिश्ता पक्का हो गया और शादी भी हो गई। शादी के ठीक पहले हमने आखिरी बार पूरी रात भर चुदाई की थी…

Category: First Time Sex

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